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Tuesday, 1 September 2026

जाना होगा

 

जाओगी जब विदा होके, पूरे मन से जाना होगा

मायके की हर बात को धीरे धीरे बिसराना होगा


हो तुम मम्मी की गुड़िया पर अपने घर के आंगन में

अब इस घर में मम्मी जैसा बनके तुम्हे दिखाना होगा


मनचाहे कपड़ों में घर में उड़ती परी खो जाएगी

हर एक आवाज पर अब पल्लू सिर से नीचे लाना होगा


मम्मी की हर डांट भी जब बारिश बनके बरसेगी

पोछ आँसुओं को अब इस नए घर को सजाना होगा


नखरे तुम्हारे उठाने को अब नाना भैया न आएंगे

ठेस लगे तो पीकर दर्द खाना भी तुम्हे बनाना होगा


घर की लक्ष्मी कहके तुम्हे जिम्मेदार बनाया जाएगा

पर खुद के लिए थोड़ा सा बचपन तुम्हे बचाना होगा


भूली बिसरी कुछ मीठी यादें बांधे रखना आँचल में

जिसने तुमको चाहा होगा उसका भी कर्ज निभाना होगा