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Tuesday, 1 September 2026

जाना होगा

 

जाओगी जब विदा होके, पूरे मन से जाना होगा

मायके की हर बात को धीरे धीरे बिसराना होगा


हो तुम मम्मी की गुड़िया पर अपने घर के आंगन में

अब इस घर में मम्मी जैसा बनके तुम्हे दिखाना होगा


मनचाहे कपड़ों में घर में उड़ती परी खो जाएगी

हर एक आवाज पर अब पल्लू सिर से नीचे लाना होगा


मम्मी की हर डांट भी जब बारिश बनके बरसेगी

पोछ आँसुओं को अब इस नए घर को सजाना होगा


नखरे तुम्हारे उठाने को अब नाना भैया न आएंगे

ठेस लगे तो पीकर दर्द खाना भी तुम्हे बनाना होगा


घर की लक्ष्मी कहके तुम्हे जिम्मेदार बनाया जाएगा

पर खुद के लिए थोड़ा सा बचपन तुम्हे बचाना होगा


भूली बिसरी कुछ मीठी यादें बांधे रखना आँचल में

जिसने तुमको चाहा होगा उसका भी कर्ज निभाना होगा

Friday, 23 December 2011

अमावास सी हर रात क्यों

गम तुम्हारा हम तुम्हारे. तुम्हारी ही हर बात क्यों.
हमारे  ही  मुकद्दर  में   हिज्र  की  ये  रात  क्यों.
एक जमाना वो भी था, चाँद मिलता था थाल में.
चल पड़ी कैसी हवाएं,अमावास सी हर रात क्यों.
भूल जाना ही मुनासिब है, शायद तुझे ऐ जिंदगी.
फैसला तो कर लूँ कुछ, पर बिखरे हैं ख़यालात क्यों.






Thursday, 22 September 2011

दिल हुआ है ख्वाहिशों की एक किताब ,
बढ़  रहे है  बरक़  जिसके  बेहिसाब .
कर सकूँ  महसूस  तुझको  जिंदगी,
हाथों में हो हाथ   मेरा इतना ख्वाब.
बात दिल की आज कह दूँ साकी तुझसे,
अब पिला आँखों से बस अपनी शराब.
तेरे  सदके  में   मिटा  मेरा  वजूद,
मै  हुआ  जर्रा  हुई  तू   माहताब.

Tuesday, 24 May 2011

ख्वाहिशें

दिल हुआ है ख्वाहिशों की एक किताब ,
बढ़  रहे है  बरक़  जिसके  बेहिसाब .
कर सकूँ  महसूस  तुझको  जिंदगी,
हाथों में हो हाथ   मेरा इतना ख्वाब.
बात दिल की आज कह दूँ साकी तुझसे,
अब पिला आँखों से बस अपनी शराब.
तेरे  सदके  में   मिटा  मेरा  वजूद,
मै  हुआ  जर्रा  हुई  तू   माहताब.